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शुक्रवार, 10 जून 2011

वेतनबोर्ड को लागू करवाने के लिए पत्रकारों का जबर्दस्त प्रदर्शन

नयी दिल्ली, 10 जून : मालिकों के दबाव में वेतनबोर्ड लागू करने में हो रही देर से नाराज पत्रकारों ने आज यहां श्रम मंत्रालय और अखबार मालिकों के संगठन आईएनएस के समक्ष विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि अगर 16 जून तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की गई तो वे देशव्यापी हडताल प्रदर्शन करेंगे। वेतनबोर्ड लागू करने की मांग को लेकर तख्तियां और बैनर लिए हजारों की संख्या में आईएनएस के समक्ष एकत्र पत्रकारों और गैर.पत्रकारों ने मालिकों की इस दलील को झूठ बताया कि इसे लागू होने से अखबार उद्योग कठिनाई में आ जायेगा। अखबारी कर्मचारियों के महासंघों के शीर्ष संगठन कान्फेडरेशन आॅफ न्यूजपेपर्स एडं न्यूज एजेंसी एम्प्लायज यूनियन्स के महासचिव एम एस यादव ने कहा, ै यह एक तथ्य है कि हर बार वेतनबोर्ड के बाद अखबार मालिकों की कमाई में बढोतरी ही हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षो में अखबारों के मुनाफे में अंधाधुंध वृद्धि हुई है जबकि पत्रकारों और गैर.पत्रकारों के वेतन में बेहद मामूली वृद्धि हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 16 जून तक वेतनबोर्ड की सिफारिशों संबंधी अधिसूचना जारी नहीं की गई तो पत्रकार और गैर.पत्रकार देश भर में बडे पैमाने पर धरना, विरोध प्रदर्शन और हडताल करेंगे।

भोपाल के पत्रकारों ने मजीठिया वेतनबोर्ड को लागू करवाने के लिए किया प्रदर्शन
भोपाल : 10 जून: पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों को लागू करने में किए जा रहे विलंब से क्षुब्ध पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों ने आज यहां विरोध प्रदर्शन किया। पीटीआई वर्कर्स यूनियन भोपाल इकाई ने कुछ स्थानीय श्रमजीवी पत्रकार संगठनों के साथ मिलकर आज यहां प्रदर्शन कर केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। फेडरेशन आफ पीटीआई एम्पलाइज यूनियन्स के काउंसिल सदस्य मनीष श्रीवास्तव एवं भोपाल इकाई महासचिव एम एस हसन ने इस अवसर पर कहा कि मालिकों के दबाव में वेतनबोर्ड लागू करने में हो रहे विलंब से पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई तेजी से बढी है और इस समय पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों को जो वेतन मिल रहा है, उसे दस साल पहले तय किया गया था, जबकि इस बीच केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का वेतन कई बार बढाया जा चुका है । श्रीवास्तव एवं हसन ने कहा कि यदि 16 जून तक इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं की गई तो पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों की देशव्यापी हडताल एवं प्रदर्शन होगा। वेतनबोर्ड लागू करने की मांग को लेकर तख्तियां लिए यहां पत्रकार भवन के समक्ष मौजूद इन पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों ने मालिकों की इस दलील को झूठ बताया कि इसे लागू होने से अखबार उद्योग कठिनाई में आ जायेगा । उन्होंने कहा कि सचाई यह है कि पिछले 15 वर्षों में अखबारों के मुनाफे में अंधाधुंध वृद्धि हुई है।

गुरुवार, 9 जून 2011

श्रम मंत्रालय और आईएनएस के सामने आज पत्रकारों का विशाल प्रदर्शन

नयी दिल्ली : अखबारों के कर्मचारियों ने लगभग 12 साल के इंतजार के बाद अपने वेतनमान में संशोधन के लिए मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों को लागू करने में सरकार की ओर से हो रही देरी और अखबार मालिकों के दुष्प्रचारों से क्षुब्ध होकर कल आईएनएस और श्रम मंत्रालय के समक्ष विशाल प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
अखबारी कर्मचारी संगठनों के शीर्ष मंच कान्फेडरेशन आफ न्यूजपेपर्स एंड न्यूज एजेंसी आर्गेनाइजेशन्स की आज यहां हुई आपात बैठक के बाद कान्फेडरेशन के महासचिव एम एस यादव ने अखबार मालिकों के संगठन के मुख्यालय आईएनएस और श्रम मंत्रालय पर जोरदार प्रदर्शन की घोषणा की।
उन्होंने कहा, आईएनएस दुष्प्रचार में लगा है। सरकार भी उसके दबाव में लगती है। अखबार मालिक अपनी बात प्रकाशित कर रहे है वहीं पर हमारे पक्ष को प्रकाशित नहीं कर रहे। आखिर वे किस तरह के अखबारी स्वतंत्रता की बात सोच रहे हैं।
यादव ने कहा, महंगाई के इस कठिन दौर में पिस रहे अखबार उद्योग के पत्रकार और गैर.पत्रकारों के सब््रा का सरकार इम्तहान ले रही है जो कतई जायज नहीं है। कल दिल्ली में कान्फेडरेशन के बैनर तले हजारों की संख्या में पत्रकार और गैर.पत्रकार कर्मचारी यूएनआई में एक बजे एकत्रित होंगे और वहां से आईएनएस और श्रम मंत्रालय की ओर मार्च करेंगे।
वेतन बोर्ड की सिफारिशें कैबिनेट के समक्ष रखने में पीएमओ कदम उठायेगा :खड़गे
श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खडगे ने आज कहा कि पत्रकारों और गैर-पत्रकारों के लिये गठित वेतन बोर्ड की सिफारिशों को मंजूरी के लिये केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय कदम उठायेगा। खड़गे से अखबार उद्योग के कर्मियों के लिये वेतन बोर्ड :रिपीट: बोर्ड संबंधी न्यायमूर्ति जी. आर मजीठिया की रिपोर्ट की स्थिति के बारे में पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा, मुझे सभी मंत्रालयों से टिप्पणियां पहले ही मिल चुकी हैं। मैंने उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दिया है। अब प्रधानमंत्री कार्यालय इस मुद्दे को कैबिनेट के समक्ष लाने के लिये निश्चित तौर पर कदम उठायेगा। ये सिफारिशें पिछले वर्ष 31 दिसम्बर को सरकार को सौंपी गयी थीं। प्रस्तावों के कार्यान्वयन में देरी के खिलाफ कर्मचारी आंदोलनरत आंदोलनरत हैं।