Friday, March 3, 2017

अपने दिमाग के जाले की सफाई जरूरी

हिंदू धरम और रामलला के रक्षक होने का दम भरने वाले आजकल अपने नेताओं को ईश्वर तुल्य दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। वे खुलेआम हिंदू धरम, ईश्वर और देवताओं की खिल्ली उडा रहे हैंं, लेकिन किसी को गुस्सा नहीं आ रहा है। क्यों भाई ? ऐसा क्यों? यही बात किसी और के मुंह से निकल जाती तो उसका गला काटकर लाने वाले को सोने में तौल देने वालों की कतार लग जाती। उस समय हमारे हिंदू वीर सुपारी देने वाले की जय जयकार करते। उससे यह पूछे बिना कि गला काटने के लिये उसके पास यह सोना आया कहां से। जाहिर है ऐसे लोगों को धरम करम से कोई लेना देना नहीं है। इनमें से अच्छी खासी संख्या ऐसे लोगों की होती है जिन्होने न तो कभी रामायण पढा, न गीता। 60-70फीसदी ऐसे लोग मिलेंगे जिन्होने वेद देखे ही नहीं होंगे, लेकिन गुलाम मानसिकता इतनी कि इनके रक्षक बनने का दम भरने वाले ठेकेदार ज्यों ही धरम के खतरे में होने का फरमान सुनाएंगे, ये लोग कट्टरपंथ की पताका पकडे सबसे आगे मिलेंगे। ये ऐसे लोग हैं जो खुद लफंगई करते हैं, लेकिन यह नहीं चाहते कि उनका बेटा भी लफंगा बने। आजकल यही लोग नरेंद्र मोदी की तुलना महात्मा बुध, महावीर स्वामी से कर रहे हैं। बाकयदे स्लोगन चलाया जा रहा है यशोदा, यशोधरा एवम यशोदाबेन. !!!* *महात्मा, महाबीर, एवम् मोदी√√√* ऐसे लोगों के कारनामों की एक बानगी देखिए अपने विरोधियों के लिये-----🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍 🤔 *दुर्योधन और राहुल गांधी- दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं। 🤔 *अर्जुन और नरेंद्र मोदी*-दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है। 🤔 कर्ण और मनमोहन सिंह-बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके। 🤔 जयद्रथ और केजरीवाल- दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई ही हुयी। 🤔 शकुनि और दिग्विजय- दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे। 🤔 धृतराष्ट्र और सोनिया- अपने पुत्र प्रेम में अंधे है। 🤔 श्रीकृष्ण और कलाम भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है। --यह है *भारत और महाभारत*

No comments:

Post a Comment