Thursday, March 30, 2017

आधार कार्ड और सुप्रीम कोर्ट

अगस्त 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार को सार्वजनिक सेवाओं के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए लैकिन यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है इसलिये हम इस पर फैसला नहीं करेंगे और इसे विचार के लिए 7 जजों की बेंच को भेजते हैं, पर यह बेंच बनाई नहीं। 20 महीने गुजर गये बेंच अब तक नहीं बनी, पता नहीं चला कि बेंच बनाने के लिए लकडी कम पड रही है या कारीगर बढई का अभाव है! आज फिर चीफ जस्टिस साहब से बेंच बनाने की विनती की गई पर उन्होंने कोई तारीख देने से इंकार कर दिया। इस बीच सरकार ने जीने से मरने तक हर जगह आधार अनिवार्य कर दिया है। फैसले लागू हो गए हैं। पिछले दिनों रायपुर में एक अस्पताल ने आधार नहीं होने पर एक मरीज का इलाज करने से मना कर दिया। कुछ महीनों में बच्चों को आधार के बगैर खाना देने मना किया जाने वाला है। झारखंड में तो आधार के बगैर बच्चों को भूत कहकर स्कूल से निकाला जा रहा है। पर सुप्रीम कोर्ट बिजी है, तारीख नहीं दे सकता! फिर भी न्यायालय में भरोसा बनाये रखें! अंसल, सहारा, टाटा के मामलों से फुरसत मिलते ही जनता की पुकार सुनी जायेगी। मुकेश त्यागी

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