Sunday, March 26, 2017

वैध-अवैध के बहाने समाज को साम्‍प्रदायिक आधार पर बांटने की संघी साजिश

वैध-अवैध के बहाने समाज को साम्‍प्रदायिक आधार पर बांटने की संघी साजिश के खिलाफ एकजुट हों! देश में ज्‍यादातर छोटी दुकानें कानूनन अवैध हैं। अगर वैध-अवैध की बात की जाये तो 95 प्रतिशत मार्केट बन्‍द हो जायेगा। अवैध तो ये भी है कि सरकारी शह पर देश के उद्योगपति मजदूरों को न्‍यूनतम मजदूरी भी नहीं देते। अवैध तो ये है कि खुद भारत की सरकार स्‍थायी प्रकृति के कामों में ठेके पर मजदूरों को रखती है। अवैध तो ज्‍यादातर बड़ी फैक्‍टरियां हैं जो दिन-दहाड़े पर्यावरण के नियमों का उल्‍लंघन करती हैं। अवैध हैं इस देश के नेता मंत्री जो चुन कर तो आते हैं जनता के वोटों से पर नीतियां बनाते हैं उद्योगपतियों के लिए। लेकिन मारूति के नौजवान मजदूरों को जेल के अन्‍दर सड़ाना वैध है। किसानों, आदिवासियों पर गोली चलाना भी वैध है। पर कुछ अवैध पर आवाज उठती है और कुछ सरकारी शह पर दबा दी जाती है। आज बुचड़खानों के नाम पर यूपी में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। हिन्‍दु चुप हैं। शायद सोच रहे हैं कि इससे उनका कुछ भला हो जायेगा। पर भला होगा उन बड़े बड़े बुचड़खानों का जो “वैध” हैं। नरेन्‍द्र मोदी जब से सत्‍ता में आये थे, तब से वो चीन से बातचीत कर लगातार कोशिश कर रहे थे कि कैसे भी करके चीन भारत का बीफ खरीदने के लिए तैयार हो जाये। मोदी जी की मेहनत रंग लायी और इस जनवरी में चीन तैयार हो गया। इस लिंक से आप वो खबर पढ़ सकते हैं - http://indianexpress.com/article/business/business-others/china-finally-agrees-to-import-buffalo-meat-from-india-4476301/ और ये भी नहीं है कि सिर्फ यूपी में मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। हर शहर में सरकारी शह पर अवैध के नाम पर छोटे-मोटे धंधे वालों को परेशान किया जा रहा है। अभी नोटबन्‍दी से भी छोटा धंधा बूरी तरह तबाह हुआ था और मॉल, बड़ी बड़ी दुकानों, ऑनलाइन पॉर्टल की चांदी हो गयी थी। आने वाले समय में जीएसटी से काम और ज्‍यादा आगे बढ़ेगा। जो ये सोच रहे हैं कि मोदी के फासीवाद में सिर्फ मुस्लिम बर्बाद होगा वो सबसे बड़ा अहमक है। हिटलर भी जब सत्‍ता में आया था तो सब यही समझते थे कि ये सिर्फ यहुदियों को निशाना बनायेगा पर उसके बाद की हकीकत सभी जानते हैं। आरएसएस आज भारत में वही कर रहा है और करने के सपने देख रहा है जो जर्मनी में नाजियों ने किया था। देश के लोगों पर है कि वो इसके खिलाफ खड़े होते हैं या फिर देश को बर्बादी की राह पर जाते देखना चाहते हैं। (Bhala Chandra ki post)

No comments:

Post a Comment