Saturday, July 20, 2013

कात्यायनी और उनके पति के नाम एक कार्यकर्ता का खुला खत


मैडम कात्यायनी जी और शशिप्रकाश जी!
एक समय था, जब हम लोग आपके सबसे प्यारे कार्यकर्ता थे। हम आपके हर हुक्म को मानते। हम आपके लिए खाना बनाते, कपड़े साफ करते, झाड़ू-पोंछा करते, किताबों की धूल साफ करते, लेकिन गलती से भी यदि दुकान में सजी किताबों को पढ़ने की कोशिश करते तो आप हम साथियों पर किताबी कीड़ा या बुद्धिजीवी बनने का लेबल चस्पा कर समूह से बहिष्कृत कर देते। हम चंदा इकट्ठा करते, अभियान चलाते, संगठन बनाते, प्रकाशन के कामों में जुटे रहते, चौबीस घंटे में से मुश्किल से पांच घंटे से ज्यादा कभी न सोते, क्रांति के लिए हम लोग हाड़तोड़ मेहनत करते। हम कहने को आपके संगठन के होलटाइमर थे, लेकिन हमें अपनी आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करके 1000-500 रुपये की कमाई भी करनी होती। आपने हममें से कइयों की पढ़ाई छुड़वा दी, हम अपनी पढ़ाई आगे जारी रखने की बात कहते, तो लताड़ मिलती कि ‘कॅरियरियरिस्ट’ हो गए हो! पूंजीवाद के सेवक बनोगे! वहीं जब हम क्रांति के लिए जरूरी मार्क्सवादी किताबों को पढ़ते, तब  भी डांट खानी पड़ती-‘किताबी कीड़े बनते जा रहे हो, तुम्हारे अंदर बुद्धिजीवी गं्रथि विकसित हो गई है...।’ वहीं आपने अपने बेटे को बाकायदा अंग्रेजी माध्यम स्कूल/कालेज में पढ़ाया, उसके पीएचडी तक करवा दी। वह जिम जाता, संगीत की शिक्षा लेता, रोज ही चिकन बिरियानी खाता और हम स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन को भी तरसते। कुलमिलाकर आपने हममें से ज्यादातर साथियों की योग्यता और कुशलता को कुचल-कुचलकर खत्म कर डाला। हां मैं जानता हूं कि इन सबके पीछे आपके पति शशि प्रकाश का ही हाथ था। शशि प्रकाश जी एक तरफ हमें अनपढ़ और जाहिल बनाते वहीं, अक्सर ही यह रटा हुआ जुमला भी सुनाते- ‘हर व्यक्ति किसी न किसी एक कार्य में कुशल होता है।’ शशि प्रकाश जी के निर्देशन में एक साल, दो साल, साल दर साल काम के दबाव के कारण हम समाज से अलग और घर परिवार से दूर हो गए। दोस्तों-रिश्तेदारों से अलग-थलग पड़ गए। उनके ही निर्देशन में लक्ष्य बनाया एक बैग से ही पूरा जीवन काटने का  और यही किया भी। आपने जब जहां जाने को कहा, बिना विलंब हम ट्रेन के साधारण डिब्बे में बैठ कर चले गए। बात के दिनों में काम करते हुए प्रश्न भी उठने लगे। जब हमने अपना मुंह खोला तब आपने निष्कासन, निलंबन, बहिष्कार, सजा और मनगढ़ंत आरोप मढ़ कर हमें संगठन से बाहर कर दिया। जब तक हमने प्रश्न नहीं किया, आपके लिए अच्छे बने रहे। प्रश्न करते ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आपके आरोप भी अबूझ व अजीब होते। कामचोर, गंवार, मउगा, नैतिक रूप से पतित, कमअक्ल, स्वार्थी, बेइमान, पेटू आदि-आदि। हालांकि, हमारे प्रश्न बहुत साधारण होते। आखिर आप तो दुनिया का सबसे बड़ा दिमाग रखने वाले मार्क्सवाद के शिक्षक हैं, हम जाहिलोें की इतनी औकात कहां कि हम मार्क्सवाद पर आपसे बहस कर पाते।
एक कम्यून में रहने के बावजूद आपके परिवार के एक सदस्य, आपके बेटे अभिनव को काजू और बादाम खिलाया जाता, जबकि दूसरे साथी मूंगफली को भी तरसते। हम क्रांति के लिए सुबह तीन बजे उठते और वह सुबह दस बजे तक सोता रहता। उसकी और आप दोनों के परिवार के किसी सदस्य की छींक का भी इलाज आपोलो और फोर्टिज में होता, जबकि हमें सरकारी अस्पताल भी जाने नहीं दिया जाता। हमसे कहा जाता-‘इच्छा शक्ति का अभाव है, बहुत कमजोर शरीर है, असली इंसान बनो, अलेक्सेई मेरेस्सेव बनो! पावेल ब्लासोव और पावेल कोर्चागिन से कुछ सीखो!’
वहीं दूसरी ओर, आपके कुनबे के सभी लोग मेहनत-मशक्कत के काम से दूर रहते। वे मौज मस्ती करते और थकावट दूर करने के नाम पर जमकर खाते-पीते। आप दोनों ने हम साथियों को मार्क्सवाद के नाम पर ठगा है। आपने अपने इकलौते बच्चे की शादी खूब धूमधाम से की, जबकि बाकी साथियों के प्रेम को भी आपने तोड़वा दिया....कई महिला साथियों से एबॉ... फिर कभी मुंह खोलूंगा...। आपके बेटे और बहू के पास ऐशोआराम के सारे सामान हैं, पूरा बंगला भरा हुआ है, जबकि हमारे तीन बच्चे के परिवार के पास एक अदद चारपाई तक नहीं है। आपके परिवार के किसी भी तथाकथित क्रांतिकारी रिश्तेदार के हाथ में बंधी एक अच्छी कलाई घड़ी देख कर पूछने पर बताया जाता कि यह घड़ी क्रांति का समय बताएगी। गोया, इतनी जरूरी घड़ी किसी दूसरे के हाथ में हो ही नहीं सकती।
आप एक -एक करके हमारी प्रतिभा को दबाते या मारते चले गए। वहीं आप लोगों की गुप्त या छिपी प्रतिभाएं भी उभरती और संवरती चली गईं। मलाल इस बात का नहीं है कि ऐसा हुआ। लेकिन, आक्रोश इस बात का है कि आपने हमें क्रांति के नाम पर ठगा। बेइमानी तो पूंजीवाद में हर कोई करता है। जानता भी है कि ठगने और ठगाने वाले सभी एक दूसरे के शिकार व शिकारी हैं, लेकिन, आप तो ईमानदारी का चोगा पहनकर ठगते रहे और अभी भी ठग रहे हैं।
इसलिए, हम आपको जनता की अदालत में ले जाना चाहते हैं-
-क्योंकि आपने जनता को धोखा दिया, उसको लूटा और बर्बाद किया।
-क्योंकि आपने हम कार्यकर्ताओं की बहुमूल्य जिंदगी को बर्बाद कर दिया। 
- क्योंकि आप जनता के माल पर मौज कर रहे हैं और उल्टे हम कार्यकर्ताओं और अपने विरोधियों को अपनी ‘हैसियत’ का रोब दिखा रहे हैं।
- क्योंकि एक तरफ आप हमें भगोड़ा कहते हैं, जबकि अपने संगठन से निकालने के बाद जब हम संकट में थे, हमें मरने के लिए बिल्कुल अकेला छोड़ दिया।
-क्योंकि हम साथियों पर आपकी ओर से लगाया गया ‘मानहानि’ का आरोप सरासर झूठा और मनगढंÞत है।
-क्योंकि आपने हममें से कई साथियों को निराशा और हताशा की अंधी गली में धकेलने का काम किया है। कई परिवारों को आपने उजाड़ दिया, उनके बच्चे सड़क पर आ गए, जबकि आपका परिवार दिन-रात तरक्की करता गया है।
- हम साथियों का आपके संगठन में किस तरह मजाक उड़ाया जाता था, क्या-क्या घटिया शब्द इस्तेमाल किए जाते थे, क्या उसका सबूत पेश करें? जनता की अदालत में जनता की मानहानि करने का केस तो आप पर बनता है।
-क्योंकि आप एक तरफ तो अपने साहित्य में ‘कोर्ट-कचहरी-न्यायालय-संविधान पर भरोसा न होने’ की बातें करते हैं और दूसरी ओर हमारे साथियों पर मानहानि का आरोप मढ़ कोर्ट में घसीटने की धमकी देते हैं।
                                                                                                                -पी. कुमार
नोट : माननीय कात्यायनी जी और शशि प्रकाश जी यदि आप चाहेंगे, तो और तथ्यों के साथ पुन: अपनी बात रखूंगा। उम्मीद है कि आप मेरे सवालों का जवाब जरूर देंगे।

7 comments:

  1. who is mr. -P.Kumar.....and what are doing now days. or you only a ...........?

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    1. P. kumar ji are you active in revolutionary activities??

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  2. naheen meri tarah we bhi naukari karte hain. Pahle kabhi shashi prakash ke sangthan se jude rahe. but who r u?

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  3. behtar hoga inhone jo sawal uthaye hain un par bat kee jaye.

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  4. jab ye pata chalega ki ye mahashay karte kya hen or kya inka badlav me koi viswas bhi he ya ese hi ninda ras leta hen tabhi to bat ki ja sakti he...varna ye kahawat bhi sahi ho sakti he ki hathi ke chalne par kutte to bhokte hi hen.........sirf isi liye in shriman ki tarif janani chahi thi.........

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  5. तुमने लिखा है मेरा परिचय जानकार ही तुम मेरे सवालों का जवाब दोगे. यदि मै इस देश का एक आम नागरिक हूँ, मजदूर हूँ, तुम्हारे संगठन में रह चुका कोई कार्यकर्त्ता हूँ, एनजीओ करता हूँ, तो क्या मुझे जवाब नहीं दिया जाना चाहिए? यह कैसा जनतंत्र है? मै भी पूछ सकता हूँ कि तुम कौन हो? क्या तुम शशि प्रकाश हो या कात्यायनी? मेरे लिए तो यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि मैंने सवाल कात्यायनी और उनके पति शशि प्रकाश से ही किया है. अगर नहीं, तो तुमसे क्या बात करना. वैसे बेहतर होगा जो सवाल उठाये गए हैं कात्यायनी और उनके पति उन सवालों का जवाब दें? एक और बात. किसी गुमान में मत रहना 'अगर कुत्ते काटने पर आ जाएँ तो तुमको नोच कर खा जायेंगे. ' - पी कुमार

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  6. abe andhe mane ye kab kaha he ki me tumahre "sawalo" ka jawab dunga? balki mane to kaha tha ki yadi badlav ki rajniti me kuch kar rahe ho to baat ki ja sakti he... ab tum khud hi nahi bata paye ki samaj badlav ke liye kiya kar rahe ho to aage bat karne ka koi matlab nahi he....Katne wale kutto ka bhi koi na koi ilaaz to hota hi he aakhir kutta to kutta hi hota he na insaan to nahi hota baki aajkal to science ki tarakki ne insaano ka ilaz bhi sambhav bana diya...

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