Thursday, May 2, 2013

हरियाणा के पबनावा गांव की दलित बस्ती में दबंगों द्वारा हमले की तथ्यात्मक रिपोर्ट

हरियाणा प्रदेश के कैथल जिले के गांव पबनावा की  दलित बस्ती पर गांव के ही दबंगों द्वारा हमले की खबर के आधार पर दिल्ली के विभिन्न प्रगतिशील, जनवादी एवं क्रान्तिकारी संगठनों की दिनांक 22 अप्रैल को एक बैठक हुई। बैठक में पबनावा गांव की दलित बस्ती पर हुए  हमले का सच जानने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग टीम का गठन किया गया! 25 अप्रैल 2013, को तीन सदस्यीय टीम दिल्ली से प्रातः सवा छह बजे पबनावा गांव के लिए रवाना हुई। टीम में जाति उन्मूलन आन्दोलन के संयोजक जे.पी. नरेला,ए न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया के महासचिव अरूण मांझी और मजदूर नेता के.के. नियोगी शामिल थे ।
दलित बस्ती पर हमले के विरोध में हरियाणा के विभिन्न संगठनों द्वारा प्रदर्शन एवं रैली
 टीम के सदस्यों को यह सूचना थी कि  इस दलित उत्पीडन की घटना के विरोध में आज 25 अप्रैल 2013 को हरियाणा प्रदेश के विभिन्न संगठन इकट्ठे होकर कैथल में डी सी आफिस पर प्रदर्शन करने जा रहे है। इसके लिए सभी संगठनों को कैथल के जवाहर पार्क में इकट्ठा होना है। इसलिए टीम, विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए करीब चार घण्टे के सफर के बाद सवा दस बजे पहले कैथल के जवाहर पार्क पहुंची । सभा के आयोजकों ने टीम के सदस्यों से सभा के समक्ष अपनी बात रखने का आग्रह करने पर टीम के सदस्य जे.पी. नरेला ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि पहले तो हम टीम की ओर से आपके इस आन्दोलन का समर्थन करते हैं । दूसरा, हरियाणा में दलित उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में चल रहा यह आन्दोलन एक सकारात्मक कदम है। तीसरी बात, हरियाणा के सभी संगठनों को मिलाकर इससे भी बड़ा एक आन्दोलन खड़ा करने का प्रयास साथ-साथ चलना चाहिए । चौथा, भारत की राजधानी दिल्ली में भी हरियाणा के विभिन्न संगठनों की तरफ से दस्तक दी जानी चाहिए और एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाना चाहिए, ताकि केन्द्र सरकार की तरफ से हरियाणा की राज्य सरकार पर एक दबाव बनाया जा सके ।
     घटना के फलस्वरूप विभिन्न संगठनों द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2013 को डी.सी. कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में दर्जनों संगठनों की तरफ से मांग की गई है कि 1) एफ.आई.आर. में दर्ज सभी दोषी व्यक्तियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए; 2) इस घटना की पूर्व आशंका एवं डी.सी.पी. कार्यालय को ठोस सूचना दिए जाने के उपरान्त सुरक्षा एवं पुख्ता प्रबंध न करने के दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए; 3) दलित बस्ती में की गई तोड़फोड़, लुटपाट व आगजनी में हुई नुकसान की तुरन्त भरपाई करवाई जाए तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए; 4) घटना से मौसमी कार्य में हुई क्षति की पूर्ति के लिए प्रति परिवार दस क्विंटल अनाज एवं वैकल्पिक रोजगार की तुरन्त व्यवस्था की जाए; 5) घटना में घायल व्यक्तियों की निशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था की जाए; 6) घटना में उत्पीड़ित परिवारों की सुरक्षा की स्थाई व्यवस्था की जाए; 7) अन्तर्जातीय विवाह करने वाले दम्पत्ति को प्रोत्साहन राशि तुरन्त मुहैय्या कराई जाए; 8) अनुसूचित जाति उत्पीड़न रोकने के लिए उत्पीड़न विरोध निवारण कमेटी का जिला स्तर पर गठन किया जाए; 9) गांव के पीड़ित परिवरों से सभी दलित परिवारों के लिए शौचालय बनवाया जाए ।
इस विरोध प्रदर्शन के बाद जिलाधीश कार्यालय से टीम के सभी सदस्य करीब दोपहर डेढ़ बजे पबनावा गांव की ओर रवाना हुए । हम सभी टीम के सदस्य  दोपहर दो बजे पबनावा की दलित बस्ती के गेट के पास पहुंचे !    हमने देखा कि करीब 15-20 पुलिस वाले दलित बस्ती के प्रवेश द्वार पर मौजूद हैं, कई तो चारपाई पर लेटे आराम फरमा रहे हैं, कई अलसाए ढंग से बैठे हैं । यह तो लग ही नहीं रहा था कि इतनी बड़ी घटना के बाद ये पुलिस कर्मी दलित बस्ती की सुरक्षा के लिए अपनी ड्यूटी मुस्तैदी के साथ निभा रहे हैं । बहुत ही अनमने, अनचाहे ढंग से, जैसे कि केवल अपनी ड्यूटी निभाने के लिए यहां बैठें हैं, और वह भी एक दलित बस्ती की सुरक्षा का कार्य जैसे उनकी मजबूरी बन गया है । जब हम गेट पर पहुंचे थे तो अलसाई आँखों से उनमें से कई बैठे हुए सिपाहियों ने हमारी ओर देखा और हमने भी उनकी ऑर देखा,! जायजा लिया और आगे निकल गए । उन्होंने हमसे यह भी नहीं पूछा कि आप कौन हो और कहां से आए हो । इसलिए हमने भी जबरदस्ती बताने की कोई आवश्यकता नहीं समझी ।
  हमले की शिकार दलित बस्ती के लगभग हर घर का टीम ने मुआयना किया और बस्ती में ज्यादातर मकान खाली पड़े थे । चन्द मकानों में इक्का-दुक्का पुरुष व महिला मौजूद थे । मुआवने के साथ-साथ टीम ने जो भी लोग दलित बस्ती में मौजूद थे उनसे घटना के सम्बन्ध में पूछताछ की और जानकारी ली । करीब दस लोगों का साक्षात्कार लिया ।
घटना और उसकी पृष्ठभूमि
इस पबनावा गांव के सूर्यकान्त नामक 21 वर्षीय युवक ने, जो पास के ही एक शहर में छोटी-मोटी नौकरी करता है और चमार जाति से सम्बन्धित है, इनके पिताश्री महेन्द्रपाल जो कि एक ईंट भट्ठा मजदूर है और गरीबी रेखा के नीचे (बी.पी.एल.) के दायरे में आते हैं, ने मीना नामक 19 वर्षीय युवती, सुपुत्री श्री पृथ्वीसिंह, जो कि रोड़ जाति से सम्बन्धित है, और गरीब किसान की श्रेणी में आते हैं,ए से 8 अप्रैल 2013 को चंडीगढ़ हाई कोर्ट में विवाह कर लिया । हाई कोर्ट में इसलिए कि डिस्ट्रीक्ट कोर्ट में उनको अपनी जान का खतरा था । इस अंतर्जातिय विवाह के बदले 13 अप्रैल 2013, शनिवार, रात करीब नौ बजे रोड़ जाति के करीब 600 लोगों ने चमार समुदाय की बस्ती पर लाठी, कुल्हाड़ी, बन्दूक, देशी कट्टा इत्यादि हथियारों के साथ हमला बोल दिया । करीब 125 मकानों के दरवाजे तोड़े, घरों का सामान तोड़फोड़ डाला, कई घरों के टेलिवीजन, फ्रिज तोड़ डाले, लगभग 10 मोटरसाइकलें तोड़ दी । नरेश कुमार, सुपुत्र श्री कलीराम, ने बताया कि उनके घर का टेलीविजन व डेªसिंग टेबल तो तोड़ा ही, साथ ही करीब 29000 रुपए भी लूट कर ले गए । दर्शनसिंह ने बताया कि उनके गैस सिलेन्डर में आग लगाकर उनके मकान में विस्फोट करने का प्रयास किया, ताकि विस्फोट के बाद घर का कोई भी सदस्य बच न पाए । घरों में लगी पानी की टंकियां तोड़ डाली, नल तोड़ दिए गए, बस्ती में कई परचून की दुकानदारी कर रहे लोगों के दुकानों का सामान उठा ले गए और बाकी सामान तोड़फोड़ दिया गया ।  हमले के दौरान तीन लोगों को गंभीर चोटें आई और रोहतक के सिविल अस्पताल में उनको भर्ती कराया गया ।
पुलिस प्रशासन की भूमिका
दलित बस्ती में मौजूद दर्शन सिंह नामक युवक से हमने पूछा कि क्या घटना की आशंका की जानकारी आपको थी । जवाब में उन्होंने बताया कि दिनांक 13 अप्रैल 2013 को रोड़ जाति के समुदाय की दिन (दोपहर) में एक पंचायत हुई थी, जिसमें करबी 500 लोग मौजूद थे । उसी में दलित बस्ती पर हमले का निर्णय लिया गया था ।
मैने करीब ढाई बजे दोपहर ढ़ाड़ां गांव के थाना प्रभारी एवं डी.एस.पी. कार्यालय में फोन कर हमले की आशंका की सूचना दी । दूसरी बार मैने करीब सायं छह बजे पुनः फोन किया । उधर से जवाब मिला कि हम पुलिस कर्मी सुरक्षा हेतु भेज रहे हैं । तीसरी बार करीब साढ़े आठ बजे रात को मैने थाना प्रभारी, ढ़ाड़ां एवं डी.एस.पी. कार्यालय को फोन किया । दिनांक 13 अप्रैल 2013 को ही फोन पर पुलिस वालों ने बताया ए कि दलित बस्ती के ही एक व्यक्ति बलवंत सिंह का भी इस सम्बन्ध में फोन आया था । उसके बाद करीब 15-20 पुलिस कर्मी दलित बस्ती से दूर घूमते दिखाई दिए । जैसे वे दलित बस्ती की सुरक्षा के लिए नहीं, कोई सैर-सपाटा करने आए थे । फिर रात नौ बजे पुलिस की मौजूगदी में ही दलित बस्ती पर हमला शुरू हुआ । दर्शनपाल ने बताया कि घटना पुलिस प्रशासन, स्थानीय राजनीतिज्ञ के गठजोड़ की शह पर ही घटित हुई है ।
इस घटना के बाद गांव ढ़ाड़ां के थाना प्रभारी ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज कर करीब 22 लोगों को गिरफ्तार किया । प्राथमिक रिपोर्ट में कुल 52 व्यक्ति नामजद हैं । 30 व्यक्ति अभी फरार हैं । एफ.आई.आर. में धारा 148/149/333/452/427/307/395/332/353/186/120बी लगाई गई है । एफ.आई.आर. नम्बर 39, दिनांक 14 अप्रैल 2013, पी.एस. ढ़ाड़ां, जिला कैथल, थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने मामला दर्ज किया ।
एफ.आई.आर. में बताया गया है कि चंदगीराम, पुत्र श्री छज्जूराम, जाति चमार, गांव पबनावा, उम्र करीब 65 साल ने रिपोर्ट दर्ज की है ए कि इस अन्तर्जातीय विवाह की सूचना के बाद रोड़ जाति के करीब 500-600 लोगों की 13 अप्रैल 2013 को पबनावा गांव में एक पंचायत हुई । पंचायत मंे निर्णय लिया गया कि रोड़ बिरादरी की लड़की को चमार जाति का लड़का भगाकर ले गया है, जिसमें हमारी बिरादरी की नाक कट गई है । इसी रंजिश के कारण सारी पंचायत ने फैसला कर योजनाबद्ध तरीके से हमारे मकानों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया और हमारे को ढे़ड, चमार, जल्लाद, कह रहे थे । हमला देशी कट्टे से लेकर लाठियों, डंडों, कुल्हाड़ियों, तलवारों से किया गया है । उपरोक्त घटना और एफ.आई.आर. के बाद युवक एवं युवती दोनों हरियाणा पुलिस के सेफ हाउस में हैं ।
इसके बाद दलित समुदाय एवं युवक के परिवार पर दबाव डाला जा रहा है कि वे इन दोनों की शादी तुड़वाकर उनकी लड़की को उनके हवाले कर दें । किन्तु चमार समुदाय ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया । श्रीमति गीता, शिक्षामंत्री, हरियाणा सरकार ने दलित परिवारों पर समझौते का भी दबाव डाला और कहा कि एक ही गांव में शादी करना ठीक नहीं होता है । घटना के पहले ही सुरक्षा कारणों की वजह से दलित परिवारों की ज्यादातर महिलाएं और बच्चे पबनावा गांव से हटाकर दूसरी जगह भेज दिए गए थे । फिलहाल पबनावा गांव में दलित परिवारों में ज्यादातर पुरुष ही मौजूद हैं । घटना के बाद दलित बस्ती के गेट पर लगभग 15-16 निहत्थे पुलिस कर्मी सुरक्षा के लिए मौजूद हैं । पबनावा गांव में गये जांच दल के एक सदस्य ने गांव के दलित समुदाय के एक व्यक्ति लक्ष्मीचंद से पूछा ए कि हरियाणा में दलित उत्पीड़न की घटनाएं निरंतर क्यों हो रही है घ् इस पर लक्ष्मीचंद का कहना है कि दबंग जातियों को कानून व्यवस्था का डर नहीं है और सरकार भी उन्हीं की है ।
घटनाक्रम के बाद दलितों को कुछ राहत सामग्री, राशन इत्यादि सरकार की ओर से भेजी गई, लेकिन दलितों ने मांग की है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं कर लिए जाते हैं, हम लोग सरकार की कोई भी राहत मंजूर नहीं करेंगे । टीम जब तथ्यों की जानकारी जुटा रही थी, तभी सरकार की तरफ से दलितों के टूटे घरों के दरवाजे बनाने के लिए दरवाजे की नाम लेते हुए कई कर्मचारी घर-घर जा रहे थे । दलित बस्ती के ही एक व्यक्ति दर्शनसिंह ने टीम को बताया कि रोड़ जाति की खेतों में मजदूरी करके गेहूं की फसल काटकर साल भर का अनाज जमा कर लेते हैं । वह हमारा नुकसान हो गया है । अब धान की खेती का समय आ रहा है । अब रोड़ जाति के लोगों के खेतों में और काम नहीं कर पाएंगे, इसलिए भविष्य में खाने के भी लाले पड़ने वाले हैं । अभी कुछ आने-जाने वाले संगठन, व एन.जी.ओ. वगैरह हम लोगों के खाने के लिए कुछ आर्थिक सहायता दे जा रहे हैं। इसलिए अभी भुखे मरने की नौबत नहीं आई है ।

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