Monday, May 9, 2011

किसका देश, किसकी धरती
देवेन्द्र प्रताप
आज अगर कश्मीर को देश से अलग होने की बात होती है, तो ज्यादातर हिंदू खून उबाल मारने लगता है। क्या वजह है इसकी? वहां की ज्यादातर आबादी मुस्लिम है इसलिए हिंदुओं को लगता है कि कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान भड़का रहा है। कुछ को यह भी लगता है कि कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान ज्यादा पसंद है, क्योंकि वह एक मुस्लिम राष्ट्र है। वैसे यह भी पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि वहां मुस्लिमों के साथ हिंदू, सिख जैसी जातियां भी हैं। हां, जैसे हमारे यहां मुस्लिमों के साथ दूसरे धार्मिक समुदाय अल्पसंख्यक हैं, उसी तरह वहां मुस्लिमों के अलावा दूसरे अल्पसंख्यक हैं। बहरहाल, कश्मीर को हिंदू एक तरफ तो मुस्लिम बहुल होने के बावजूद हिंदुस्तान से अलग नहीं होने देना चाहते, वहीं दूसरी ओर यहां ऐसे लोगों की भी अच्छी खासी तादाद है, जो भारत से सारे मुसलमानों को पाकिस्तान खदेड़ देना चाहते हैं। अरे भाई और भी मुसलमान मुल्क हैं, वहां क्यों नहीं? क्या आपको पाकिस्तान से कुछ ज्यादा ही लगाव है। इस बारे में मैं आपका उत्तर जानता चाहता हूं। अब अगर इसी तर्क को आधार बनाया जाए और यह मानकर चलें कि भारत देश का स्वरूप कैसा है, तो फिर हम किसी नतीजे तक पहुंचने में कामयाब हो सकते हैं। सभी को पता ही है कि भारत एक संघीय गणराज्य है। गणराज्य का मतलब कई सारे राज्यों का एक समूह। ऐसे में किसी राज्य की बहुसंख्यक आबादी की भावना का महत्व बढ़ जाता है। वह चाहे कश्मीर हो या फिर कोई अन्य राज्य। इसी तर्क को अगर और आगे बढ़ाया जाए और जिलों और फिर तहसीलों के भी डेमोक्रेटिक राइट की अगर बात की जाए, तो हमारे पास कई ऐसे जिले और तहसील होंगी, जहां से हिंदुओं को बाहर करने का फरमान जारी किया जाना चाहिए। आखिर जो तर्क राज्य या देश के बारे में लागू होता है, वह किसी छोटे भौगोलिक इकाई के ऊपर क्यों नहीं लागू हो सकता। क्या हम देश के स्तर पर अगर अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक का खेल खेल सकते हैं, तो जिला या फिर तहसील के स्तर पर क्यों नहीं। इसके पीछे का क्या कारण है? मैं स्वयं भी इस बात को जानना चाहता हूं। कुछ लोग कहते हैं कि भारत के मूल निवासी हिंदू हैं न कि मुसलमान। मुसलमान तो आक्रांता हैं। वह तो एक परदेसी है, जो यहां आकर कब्जा जमाकर बैठ गया। यह बात भी नहीं समझ में आती। मूल निवासी की पूरी अवधारणा ही बड़ी झोल वाली है। मूल निवासी तो यहां के शूद्र हैं, यह बात ऐतिहासिक सबूतों के साथ साबित भी हो चुकी है। ऐसे में इस भौगोलिक इलाके के लिए आक्रांता तो यहां के सवर्ण हुए, जिन्होंने भारत के ज्यादातर संसाधनों पर कब्जा जमा रखा है। इस संदर्भ में बात की जाती है, तो हिंदू सवर्ण के रूप में सामने आ खड़ा होता है। अब वह एक सवर्ण ही नहीं एक राजा की तरह बात करने लगता है। न जाने कितने रूप हैं, इसके। सही बताऊं तो इन सबने मिलकर एकदम से दिमाग का दही बना दिया है। फिलहाल तो सोने का मन कर रहा है। हां नाम पता दे दे रहा हूं, अगर यह पहेली कुछ समझ में आ जाए तो फोन कर लीजिएगा।

No comments:

Post a Comment